Monday, 16 March 2015

Experience

अनुभव


थी खोज मुझको हर्ष की, सघर्ष की ।
शत शताब्दियों से इस वर्ष की ।।
यह वर्ष था इतिहास का सबसे अनोखा काल ।
घट चुकी घटनाएँ थी विकराल ।।
जो पढ रहे या सुन रहे है, ये सर्व इन्ही को श्रेय़ ।
श्रेय इनकी मूर्खता है या मुर्खता है ध्येय ।।
कुछ अटपटे, कुछ चटपटे, थे इस वर्ष के कलाप ।
जोर से, या शोर से, कर लिए गये चुपचाप।।
ताज्जुब न करना जानकर ।
हकीकत को पहचान कर ।।
ताज्जुब हुआ मुझको भी था ।
जब Mass Bunk Cancel हुआ।।
बस! तीन Attendance हुई थी, है मुझे ये याद।
वैसे Sir भी तो आए थे, घण्टों के बाद।।
वो Class भी Boring थी, Graphics के Sir जैसी।
Drawing करना पडता था, मशीनेें थी कैसी-कैसी।।
कुछ भी कहो Chemistry Lab को, तुम हो अगर स्वाधीन।
Teacher चाहे जैसे हो, पर Class थी रंगीन।।
Chemistry के सब Particle, जादू जैसे होते थे।
कुछ Exception को छोडकर, सारे बच्चे सोते थे।।
मैं था खुद को समझाता, मैं जगता था, न सोता था।
Lecture पर ध्यान देता था, तो लोरी जैसा लगता था।।
रोते थे सब बच्चे जब, C.S. के Sir आते थे।
कुछ तो Attendance के बाद, Window से कूद जाते थे।।
Blackboard से नजर हटी, आधी रणभूमि खाली थी।
जो Sir थोडे दुर्योधन थे, ये उनके मुहँ पर गाली थी।।
पर शान्त रहा दुर्योधन तब, उसने ये मन में ठानी थी।
Grade उसी के हाथ में थे, तभी तो की मनमानी थी।।
कुछ कहनी थी बात उन्हें, जो Communication से डरते थे।
बेचारे!, Back Side के Benches पर, वो Drawing बनाकर कहते थे।।
अगर समय लगे जो तुमको भी, पीछे जाकर देखो तो।
गौर से समझो, उनकी बातें, या उन यादों से कुछ सीखो तो।।
हम बात करेगें Mathematics की, थी अनोखी Class वही।
हँसते थे Sir इतना की, हँसने की कोई बात नही।।
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